पाठ ६ : एक टोकरी भर मिट्टी
लेखक: माधवराव सप्रे | सम्पूर्ण कहानी-सार, नैतिक दृष्टि एवं समग्र अभ्यास हल
- लेखक परिचय: इस कालजयी कहानी के लेखक माधवराव सप्रे (1871–1926) हैं। इनका जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ था। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से इन्होंने हिन्दी सेवा का व्रत लिया और तिलक के प्रसिद्ध ग्रंथ 'गीता-रहस्य' का मराठी से हिन्दी में अनुवाद किया। 'स्वदेशी आंदोलन और बायकॉट' इनकी प्रमुख कृतियों में से है।
- ऐतिहासिक महत्व: 'एक टोकरी भर मिट्टी' को हिन्दी की प्रथम मौलिक कहानियों में अत्यंत आदरणीय स्थान प्राप्त है। यह कहानी सन् 1901 में 'छत्तीसगढ़ मित्र' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।
- केंद्रीय भाव एवं संदेश: यह कहानी धन-मद में डूबे जमींदार के अन्याय पर एक असहाय वृद्धा की मूक वेदना और नैतिक विजय को दर्शाती है। यह सिखाती है कि भौतिक शक्ति से आत्मिक शक्ति और न्यायबोध कहीं अधिक बलवान होता है।
"किसी श्रीमान् ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। वृद्धा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी... श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए, तब वे अपनी ज़मींदारी चाल चलने लगे। बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया।"
जमींदार अपने विलासितापूर्ण महल का बगीचा बढ़ाने के लिए एक बेसहारा वृद्धा की झोपड़ी छीन लेता है, जिसमें उसके पूरे परिवार (पति, पुत्र, बहू) की यादें बसी थीं। कानूनी छल-कपट और धन के बल पर वह वृद्धा को बेघर कर देता है।
"ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है... वह लज्जित होकर कहने लगे कि, 'नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।' यह सुनकर वृद्धा ने कहा, 'महाराज, नाराज न हों... आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए।' ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। पर वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।"
वृद्धा ने एक टोकरी मिट्टी को माध्यम बनाकर जमींदार को यह आत्मज्ञान करा दिया कि जब वह एक टोकरी मिट्टी का भौतिक भार नहीं उठा सकता, तो इस अन्याय और पाप का नैतिक भार वह जीवन-भर कैसे उठाएगा। इस मर्मस्पर्शी सत्य ने जमींदार के अहंकार को चूर-चूर कर दिया और उसने पश्चाताप करते हुए झोपड़ी लौटा दी।
१. यथार्थवादी एवं प्रतीकात्मक शिल्प: कहानी में 'मिट्टी की टोकरी' केवल मिट्टी नहीं, बल्कि शोषित वर्ग के स्वाभिमान, पारिवारिक स्मृतियों और अनैतिक कर्मों के असह्य नैतिक भार का सशक्त प्रतीक है।
२. वर्ग-संघर्ष का चित्रण: तत्कालीन सामंती व्यवस्था में गरीबों, अनाथों और महिलाओं पर होने वाले सामाजिक-आर्थिक अत्याचारों का अत्यंत सजीव और मनोवैज्ञानिक चित्रण किया गया है।
३. हृदय-परिवर्तन का आदर्श: कहानी हिंसा या बदले के बजाय आत्मबोध, विवेक और सत्य के द्वारा पापी के अंतःकरण को बदलने का संदेश देती है।
(क) मेरी समझ से [पृष्ठ - 78]
(1) ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?
(2) वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी?
(3) वृद्धा के बार-बार गिड़गिड़ाने पर ज़मींदार के मन में क्या भाव आया?
(4) कहानी का अंत कैसा है?
(ख) मिलकर करें मिलान (वाक्य एवं सही निष्कर्ष) [पृष्ठ - 79]
| वाक्य (पाठ से) | सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष |
|---|---|
| 1. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी। |
| 2. वकीलों की थैली गरम कर अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा किया। | ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपड़ी पर कब्जा किया। |
| 3. आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती... | वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया। |
| 4. ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो कर्तव्य भूल गए थे। | धन और अहंकार ने जमींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था। |
| 5. कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी। | अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़मींदार ने क्षमा माँगी। |
| 6. उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? | वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है। |
| 7. कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए... | वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया। |
| 8. उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और आँसू बहने लगे। | झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई। |
(ग) सोच-विचार के लिए [पृष्ठ - 80]
(क) कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
उत्तर: वृद्धा (बूढ़ी औरत) सबसे प्रभावशाली पात्र है। उसने बिना किसी कटुता, हिंसा या झगड़े के, केवल अपनी बुद्धिमत्ता, विनम्रता और एक टोकरी मिट्टी के प्रतीकात्मक प्रयोग से अहंकारी जमींदार का हृदय बदल दिया।
(ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
उत्तर: पोती अपनी पैतृक झोपड़ी से अत्यधिक प्रेम करती थी। बेघर होने के दुःख में वह हठ कर रही थी कि वह अपने पुराने घर में ही जाकर रोटी खाएगी।
(ग) ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
उत्तर: जमींदार ने रिश्वत देकर चालाक वकीलों की थैली गरम की और कानूनी दांवपेंचों का सहारा लेकर अदालत से झोपड़ी पर अन्यायपूर्ण कब्जा कर लिया।
(घ) 'ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने' की क्रिया का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि जमींदार ने वृद्धा को अपनी बात कहने की मौन स्वीकृति (इजाजत) दे दी।
(ङ) ज़मींदार ने वृद्धा से क्षमा माँगकर झोंपड़ी वापस क्यों दी?
उत्तर: वृद्धा की बातों से जमींदार का अंतःकरण जाग उठा। उसे अहसास हुआ कि जब वह एक टोकरी मिट्टी का भार नहीं उठा पा रहा, तो एक गरीब के घर को छीनने के पाप का भार वह कभी नहीं उठा पाएगा। आत्मग्लानि और पश्चाताप के कारण उसने झोपड़ी वापस कर दी।
(घ) भाषा की बात : 'कि' और 'की' का सही प्रयोग [पृष्ठ - 81-82]
- वृद्धा ने कहा कि वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
- वह अपनी पोती की चिंता में दुखी हो गई थी।
- वृद्धा ने प्रार्थना की कि टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए।
- पोती हमेशा कहती थी कि वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
- झोंपड़ी की मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
- उसे विश्वास था कि मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
- वृद्धा की आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी।
- उसने यह सोचा कि झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
- वृद्धा के मन की पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
- ज़मींदार इतने लज्जित हुए कि टोकरी उठाने की बात मान ली।
- उस झोंपड़ी की हर दीवार वृद्धा की यादों से भरी थी।
(ङ) व्याकरण : काल-रूपांतरण एवं वचन-अनुस्वार प्रयोग [पृष्ठ - 83]
(१) वाक्यों का वर्तमान और भविष्य काल में रूपांतरण:
- वह गिड़गिड़ाकर बोली: ➔ वर्तमान: वह गिड़गिड़ाकर बोलती है। | भविष्य: वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी।
- श्रीमान् ने आज्ञा दे दी: ➔ वर्तमान: श्रीमान् आज्ञा देते हैं। | भविष्य: श्रीमान् आज्ञा देंगे।
- आँखों से आँसू बहने लगे: ➔ वर्तमान: आँखों से आँसू बहने लगते हैं। | भविष्य: आँखों से आँसू बहने लगेंगे।
- अहाता बढ़ाने की इच्छा हुई: ➔ वर्तमान: अहाता बढ़ाने की इच्छा होती है। | भविष्य: अहाता बढ़ाने की इच्छा होगी।
- क्षमा माँगी और झोंपड़ी वापस दी: ➔ वर्तमान: क्षमा माँगते हैं और झोंपड़ी वापस देते हैं। | भविष्य: क्षमा माँगेंगे और झोंपड़ी वापस देंगे।
(२) वचन एवं अनुस्वार अनुसार सही शब्द चयन [पृष्ठ - 83]:
- वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई।
- वृद्धा गिड़गिड़ाकर बोली।
- पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।
- उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी थी।
- उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले आई।
- झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला गईं।
- एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए हैं।
(च) भाववाचक संज्ञा मिलान [पृष्ठ - 86]
| काव्य / गद्य पंक्ति | प्रकट होने वाला भाव |
|---|---|
| वह लज्जित होकर कहने लगे... | लज्जा / पछतावा |
| वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं | बोध / आत्मज्ञान |
| उनके मन में कुछ दया आ गई | करुणा / दया |
| भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी | आस्था / विश्वास |
| महाराज क्षमा करें तो एक विनती है | विनम्रता / विनय |
| पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी | ममता / स्नेह |
| धन-मद से गर्वित हो कर्तव्य भूल गए थे | अहंकार / घमंड |
| बिना मरे वहाँ से वह निकलना नहीं चाहती थी | जुड़ाव / मोह |
| मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी | दुख / पीड़ा |
| वकीलों की थैली गरम कर कब्जा कर लिया | क्रूरता / अन्याय |
(छ) आज की पहेली एवं जन-शिकायत पोर्टल [पृष्ठ - 89-90]
वर्तमान में किसी भी प्रकार के अन्याय या प्रशासनिक समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार के CPGRAMS (pgportal.gov.in) अथवा राज्य सरकारों के जनसुनवाई पोर्टल (jansunwai.up.nic.in) पर निःशुल्क ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
१. कठिन शब्दार्थ तालिका
| क्र.सं. | कठिन शब्द | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|---|
| 1 | अहाता | परिसर / प्रांगण / बाड़ा | महल के अहाते में सुंदर बाग लगाया गया था। |
| 2 | मृतप्राय | मरे हुए के समान / अधमरा | पुत्र-शोक में वृद्धा मृतप्राय हो गई थी। |
| 3 | निष्फल | व्यर्थ / बेअसर / बिना फल का | वृद्धा को डराने के सारे प्रयास निष्फल रहे। |
| 4 | धन-मद | धन का नशा / संपत्ति का अहंकार | धन-मद में अंधा व्यक्ति मानवता भूल जाता है। |
| 5 | कृतकर्म | किया हुआ अनुचित कार्य | जमींदार को अपने कृतकर्म पर पश्चाताप हुआ। |
| 6 | पतोहू | पुत्रवधू / बहू | वृद्धा की पतोहू पाँच वर्ष की बेटी छोड़कर चल बसी। |
२. विलोम एवं पर्यायवाची शब्द सारणी
| शब्द | विलोम शब्द | पर्यायवाची शब्द |
|---|---|---|
| अनाथ | सनाथ | बेसहारा, यतीम, निराश्रित |
| निष्फल | सफल, फलदायी | व्यर्थ, निरर्थक, बेकार |
| लज्जित | निर्लज्ज, गर्वित | शर्मिंदा, संकोची, पानी-पानी |
| महल | झोंपड़ी, कुटिया | प्रासाद, राजभवन, हवेलिया |
३. संधि, समास, उपसर्ग एवं प्रत्यय सारणी
| घटक का प्रकार | शब्द / पद | विच्छेद / विग्रह / विश्लेषण |
|---|---|---|
| संधि | निष्फल स्मरण | निः + फल (विसर्ग संधि) स्मृ + अन (व्यंजन संधि) |
| समास | वृद्धावस्था धन-मद खाना-पीना | वृद्ध होने की अवस्था (कर्मधारय) धन का मद/घमंड (तत्पुरुष समास) खाना और पीना (द्वंद्व समास) |
| उपसर्ग | अनाथ पश्चाताप | अ (उपसर्ग) + नाथ पश्चात् (उपसर्ग) + ताप |
| प्रत्यय | ज़मींदारी गर्वित | ज़मींदार + ई (प्रत्यय) गर्व + इत (प्रत्यय) |
४. पाठ में प्रयुक्त मुहावरे
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| बाल की खाल निकालना | अनावश्यक व अत्यधिक बारीक छानबीन करना | चालाक वकील बाल की खाल निकालकर मुकदमे को उलझा देते हैं। |
| थैली गरम करना | रिश्वत (घूस) देना | अधिकारियों की थैली गरम करके भ्रष्टाचारी अपना काम निकाल लेते हैं। |
| आँखें खुलना | सच्चाई का ज्ञान होना / होश में आना | वृद्धा के मार्मिक वचनों से जमींदार की आँखें खुल गईं। |
| फूट-फूट कर रोना | अत्यधिक बिलख-बिलख कर रोना | झोपड़ी छिन जाने पर वृद्धा फूट-फूट कर रोने लगी। |

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