संस्कृत-व्याकरणम् | प्रकरणम् - धातु एवं लकार-विचारः
धातु-परिचयः, दश लकाराः एवं सम्पूर्ण रूप-संरचना
परस्मैपदी एवं आत्मनेपदी सभी १० लकारों के पृथक्-पृथक् विस्तृत चार्ट एवं प्रत्यय-सारणी
१. धातु एवं क्रियापद परिचयः [प्रकरण - १]
धातु (Verb Root): संस्कृत व्याकरण में क्रियाओं के मूल एवं अविभाज्य रूप को 'धातु' कहते हैं। धातु ही संस्कृत शब्दों एवं क्रियापदों के निर्माण का मूल तत्त्व है।
क्रियापद-लक्षण: जिन शब्दों के द्वारा किसी काम का करना या होना पाया जाता है, उसे क्रियापद कहते हैं। धातु शब्द का मूल अर्थ 'धारण करना', 'पोषित करना' आदि है। यथा— पठति, गच्छति, लिखति, क्रीडति क्रियापदों में क्रमशः पठ्, गम्, लिख्, क्रीड् मूल धातुएँ हैं।
प्रमुख धातु-उदाहरण: भू (होना), स्था (ठहरना), ज्ञा (जानना), युज् (जोड़ना), गम् (जाना), मन् (मानना), दृश् (देखना), सेव् (सेवा करना), लभ् (पाना), कृ (करना)।
लट् वर्तमाने लेट् वेदे भूते लुङ् लङ् लिटस्तथा ।
विध्याशिषोस्तु लिङ् लोटौ लुट् लृट् लृङ् च भविष्यतः ॥
श्लोकार्थ: संस्कृत व्याकरण में काल (Tense) और भाव/मनोदशा (Mood) का बोध कराने हेतु १० (दश) लकार निर्धारित हैं। वर्तमान में लट्; वेद में लेट्; भूतकाल में लुङ्, लङ्, लिट्; विधि (परामर्श) व आशीर्वाद में विधिलिङ् एवं आशीर्लिङ्; आज्ञा में लोट्; तथा भविष्यत् काल में लुट्, लृट् और लृङ् लकारों का प्रयोग होता है।
दश लकारों का विस्तृत विवेचन (10 Lakaras Breakdown):
- लट् लकार (वर्तमान काल - Present Tense): वर्तमान काल की क्रिया को प्रदर्शित करने हेतु। (उदा. पठति)
- लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल - Past Tense): अनद्यतन भूतकाल (बीते हुए समय) के लिए। (उदा. अपठत्)
- लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् काल - Simple Future Tense): सामान्य भविष्यत् काल का बोध कराने हेतु। (उदा. पठिष्यति)
- लोट् लकार (आज्ञार्थ - Imperative Mood): आज्ञा, आदेश, प्रार्थना अथवा अनुमति के अर्थ में। (उदा. पठतु)
- विधिलिङ् लकार (विधि/चाहिए अर्थ - Potential Mood): विधि, परामर्श, संभावना या 'चाहिए' के अर्थ में। (उदा. पठेत्)
- लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल - Aorist/General Past): सामान्य भूतकाल की क्रिया का बोध कराने हेतु। (उदा. अपाठीत्)
- लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल - Perfect/Remote Past): परोक्ष भूतकाल—जो प्रत्यक्ष न होकर ऐतिहासिक विषय हो। (उदा. पपाठ)
- लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् काल - First Future): जो आज का दिन छोड़कर आगे होने वाला हो। (उदा. पठिता)
- आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ - Benedictive Mood): आशीर्वाद देने अथवा मंगल-कामना हेतु। (उदा. पठ्यात्)
- लृङ् लकार (हेतुहेतुमद्भाव भविष्यत् - Conditional Mood): शर्त वाले वाक्यों में (यदि ऐसा होता तो ऐसा होता)। (उदा. अपठिष्यत्)
२. पुरुष, वचन एवं पद-भेद व्यवस्था [प्रकरण - २]
पुरुष-व्यवस्था (3 Persons)
- प्रथम पुरुष (अन्य पुरुष): अस्मद् और युष्मद् को छोड़कर शेष सभी कर्ता (सः, तौ, ते, बालकाः आदि)।
- मध्यम पुरुष: केवल 'युष्मद्' शब्द के कर्ता (त्वम्, युवाम्, यूयम्)।
- उत्तम पुरुष: केवल 'अस्मद्' शब्द के कर्ता (अहम्, आवाम्, वयम्)।
वचन-व्यवस्था (3 Numbers)
- एकवचन: एक कर्ता का बोध कराने वाला (यथा— बालकः पठति)।
- द्विवचन: दो कर्ताओं का बोध कराने वाला (यथा— बालकौ पठतः)।
- बहुवचन: दो से अधिक कर्ताओं का बोध कराने वाला (यथा— बालकाः पठन्ति)।
धातु-पद भेद (3 Types)
- परस्मैपदी: क्रिया का फल कर्ता को छोड़कर अन्य (कर्म) को मिले (तिप्, तस्, झि आदि ९ प्रत्यय)।
- आत्मनेपदी: क्रिया का फल सीधा कर्ता को मिले (त, आताम्, झ आदि ९ प्रत्यय)।
- उभयपदी: जिनके रूप परस्मैपदी एवं आत्मनेपदी दोनों में चलते हैं (यथा: कृ, याच्)।
विशेष ध्यातव्यम् (विकरण, अडागम एवं इडागम नियम):
• अडागम नियम: लङ्, लुङ् एवं लृङ् लकारों में धातु से पूर्व 'अ' (अडागम) अनिवार्य रूप से जुड़ता है (यथा: अ + पठ् + त् = अपठत्)।
• विकरण प्रत्यय: मूल धातु एवं तिङ्-प्रत्ययों के मध्य गण के अनुसार विकरण प्रत्यय (जैसे भ्वादिगण में 'शप्' = 'अ') जुड़ता है।
• इडागम नियम: सेट् धातुओं में भविष्यत् काल (लृट्) तथा अन्य लकारों में प्रत्यय से पूर्व 'इ' का आगम होता है (पठ् + इ + ष्यति = पठिष्यति)।
३. परस्मैपदी सम्पूर्ण १० लकार-प्रत्यय सारणी [प्रकरण - ३]
नीचे परस्मैपदी के सभी १० लकारों के पृथक्-पृथक् विस्तृत चार्ट दिए गए हैं:
१. लट् लकार (वर्तमान काल - Present Tense)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
ति |
तस् (तः) |
अन्ति |
| मध्यम पुरुष |
सि |
थस् (थः) |
थ |
| उत्तम पुरुष |
मि |
वस् (वः) |
मस् (मः) |
२. लङ् लकार (भूतकाल - Past Tense) [अ + धातु + प्रत्यय]
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
त् |
ताम् |
अन् |
| मध्यम पुरुष |
ः (विसर्ग) |
तम् |
त |
| उत्तम पुरुष |
अम् |
आव |
आम |
३. लृट् लकार (भविष्यत् काल - Future Tense)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
ष्यति |
ष्यतः |
ष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष |
ष्यसि |
ष्यथः |
ष्यथ |
| उत्तम पुरुष |
ष्यामि |
ष्यावः |
ष्यामः |
४. लोट् लकार (आज्ञार्थ - Imperative Mood)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
तु |
ताम् |
अन्तु |
| मध्यम पुरुष |
अ / हि |
तम् |
त |
| उत्तम पुरुष |
आनि |
आव |
आम |
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ - Potential Mood)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
एत् |
एताम् |
एयुः |
| मध्यम पुरुष |
एः |
एतम् |
एत |
| उत्तम पुरुष |
एयम् |
एव |
एम |
६. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल - Aorist/General Past) [अ + धातु + प्रत्यय]
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
त् (द्) |
ताम् |
अन् |
| मध्यम पुरुष |
स् |
तम् |
त |
| उत्तम पुरुष |
अम् |
व |
म |
७. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल - Perfect/Remote Past)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
अ (णल्) |
अतुस् |
उस् |
| मध्यम पुरुष |
थल् (थ) |
अथुस् |
अ |
| उत्तम पुरुष |
अ (णल्) |
व |
म |
८. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् काल - First Future)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
ता |
तारौ |
तारस् (तारः) |
| मध्यम पुरुष |
तासि |
तास्थस् (तास्थः) |
तास्थ |
| उत्तम पुरुष |
तास्मि |
तास्वस् (तास्वः) |
तास्मस् (तास्मः) |
९. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ - Benedictive Mood)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
यात् |
यास्ताम् |
यासुस् (यासुः) |
| मध्यम पुरुष |
यास् (याः) |
यास्तम् |
यास्त |
| उत्तम पुरुष |
यासम् |
यास्व |
यास्म |
१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद्भाव भविष्यत् काल - Conditional Mood) [अ + धातु + प्रत्यय]
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
स्यत् |
स्यताम् |
स्यन् |
| मध्यम पुरुष |
स्यस् (स्यः) |
स्यतम् |
स्यत |
| उत्तम पुरुष |
स्यम् |
स्याव |
स्याम |
४. आत्मनेपदी सम्पूर्ण १० लकार-प्रत्यय सारणी [प्रकरण - ४]
नीचे आत्मनेपदी के सभी १० लकारों के पृथक्-पृथक् विस्तृत चार्ट दिए गए हैं:
१. लट् लकार (वर्तमान काल - Present Tense)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
ते |
आते |
अन्ते |
| मध्यम पुरुष |
से |
आथे |
ध्वे |
| उत्तम पुरुष |
ए |
वहे |
महे |
२. लङ् लकार (भूतकाल - Past Tense) [अ + धातु + प्रत्यय]
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
त |
आताम् |
अन्त |
| मध्यम पुरुष |
थास् |
आथाम् |
ध्वम् |
| उत्तम पुरुष |
इ |
वहि |
महि |
३. लृट् लकार (भविष्यत् काल - Future Tense)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
स्यते |
स्येते |
स्यन्ते |
| मध्यम पुरुष |
स्यसे |
स्येथे |
स्यध्वे |
| उत्तम पुरुष |
स्ये |
स्यावहे |
स्यामहै |
४. लोट् लकार (आज्ञार्थ - Imperative Mood)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
ताम् |
आताम् |
अन्ताम् |
| मध्यम पुरुष |
स्व |
आथाम् |
ध्वम् |
| उत्तम पुरुष |
ऐ |
आवहै |
आमहै |
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ - Potential Mood)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
ईत |
ईयाताम् |
ईरन् |
| मध्यम पुरुष |
ईथास् (ईथाः) |
ईयाथाम् |
ईध्वम् |
| उत्तम पुरुष |
ईय |
ईवहि |
ईमहि |
६. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल - Aorist/General Past) [अ + धातु + प्रत्यय]
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
त |
आताम् |
अन्त |
| मध्यम पुरुष |
थास् |
आथम् |
ध्वम् |
| उत्तम पुरुष |
इ |
वहि |
महि |
७. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल - Perfect/Remote Past)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
ए |
आते |
इरे |
| मध्यम पुरुष |
से |
आथे |
ध्वे |
| उत्तम पुरुष |
ए |
वहे |
महे |
८. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् काल - First Future)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
ता |
तारौ |
तारस् |
| मध्यम पुरुष |
तासे |
तासाथे |
ताध्वे |
| उत्तम पुरुष |
ताहे |
तास्वहे |
तास्महे |
९. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ - Benedictive Mood)
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
सीष्ट |
सीयास्ताम् |
सीरन् |
| मध्यम पुरुष |
सीष्ठास् |
सीयास्थाम् |
सीध्वम् |
| उत्तम पुरुष |
सीय |
सीवहि |
सीमहि |
१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद्भाव भविष्यत् काल - Conditional Mood) [अ + धातु + प्रत्यय]
| पुरुष |
एकवचन |
द्विवचन |
बहुवचन |
| प्रथम पुरुष |
स्यत |
स्येताम् |
स्यन्त |
| मध्यम पुरुष |
स्यथास् |
स्येथाम् |
स्यध्वम् |
| उत्तम पुरुष |
स्ये |
स्यावहि |
स्यामहि |
५. रूप-साधना एवं पद-विश्लेषण सारणी [प्रकरण - ५]
| क्र.सं. |
मूल धातु |
लकार एवं पद |
पुरुष व वचन |
रूप-सिद्धि प्रक्रिया |
निष्पन्न क्रियापद |
| १. |
पठ् (पढ़ना) |
लट् (परस्मै.) |
प्रथम, एकवचन |
पठ् + अ (शप् विकरण) + ति |
पठति |
| २. |
गम् (जाना) |
लङ् (परस्मै.) |
प्रथम, बहुवचन |
अ (अडागम) + गच्छ् + अन् |
अगच्छन् |
| ३. |
भू (होना) |
लृट् (परस्मै.) |
मध्यम, एकवचन |
भो → भव् + इ (इडागम) + ष्यसि |
भविष्यसि |
| ४. |
सेव् (सेवा) |
लट् (आत्मने.) |
प्रथम, एकवचन |
सेव् + अ (शप्) + ते |
सेवते |
| ५. |
लभ् (पाना) |
विधिलिङ् (आत्मने.) |
प्रथम, एकवचन |
लभ् + अ + ईत → लभेत |
लभेत |
६. प्रमुख धातुरूप अध्ययन-निर्देशिका [Quick Access Directory]
विद्यार्थियों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण एवं परीक्षा-उपयोगी धातुरूपों के पृष्ठ नीचे दिए गए हैं। सम्बंधित लिंक पर क्लिक करके उनके पाँचों लकारों के विस्तृत रूप देखें:
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