अनुप्रास अलंकार: संपूर्ण मार्गदर्शिका
नियम, 5 उप-भेद, 10 वर्ण-वार उदाहरण एवं स्व-मूल्यांकन अभ्यास
व्युत्पत्ति एवं अर्थ
'अनुप्रास' शब्द तीन पदों के योग से बना है—अनु + प्र + आस:
- अनु: बार-बार / पीछे-पीछे
- प्र: प्रकृष्ट रूप से (सुंदर ढंग से)
- आस: बैठना या रखना (वर्णों का विन्यास)
परिभाषा: जहाँ काव्य में स्वर की समानता न होने पर भी व्यंजन वर्णों की आवृत्ति एक से अधिक बार क्रमानुसार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
(जब किसी काव्य-पंक्ति में एक ही वर्ण (व्यंजन अक्षर) की आवृत्ति दो या दो से अधिक बार लगातार होती है, तो वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।)
🎯 अनुप्रास अलंकार पहचानने के 3 अचूक नियम:
- केवल वर्ण देखा जाता है, स्वर की मात्रा नहीं: यदि अक्षर समान है तो मात्रा भिन्न होने पर भी अनुप्रास होगा (जैसे: किरण, कुल, कान में 'क' वर्ण की आवृत्ति)।
- वर्णों की स्थिति: अधिकांशतः वर्ण शब्दों के आरंभ में आते हैं, किंतु मध्य या अंत में भी समान वर्ण आने पर अनुप्रास होता है।
- नाद-सौंदर्य: वर्णों के दोहराव से पंक्ति को पढ़ने में एक विशेष लय या संगीत जैसा अनुभव होता है।
2. विस्तृत स्पष्टीकरण एवं काव्य-अर्थ सहित 10 प्रमुख उदाहरण
1. 'त' वर्ण की आवृत्ति:
"तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।"
स्पष्टीकरण: यहाँ 'त' वर्ण की आवृत्ति लगातार पाँच शब्दों के आरंभ में हुई है।
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2. 'च' एवं 'ल' वर्ण की आवृत्ति:
"चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल-थल में।"
स्पष्टीकरण: पहले चरण में 'च' वर्ण की तथा दूसरे चरण में 'ल' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
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3. 'र' एवं 'प' वर्ण की आवृत्ति:
"रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम।"
स्पष्टीकरण: प्रथम पंक्ति में 'र' वर्ण और द्वितीय पंक्ति में 'प' वर्ण की आवृत्ति है।
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4. 'क' वर्ण की आवृत्ति:
"कालिंदी कूल कदंब की डारन।" (रसखान के सवैये)
स्पष्टीकरण: यहाँ 'क' वर्ण की आवृत्ति तीन शब्दों (कालिंदी, कूल, कदंब) में हुई है।
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5. 'म' एवं 'स' वर्ण की आवृत्ति:
"मुदित महीपति मंदिर आए, सेवक सचिव सुमंत बुलाए।"
स्पष्टीकरण: पहले पद में 'म' वर्ण की तथा दूसरे पद में 'स' वर्ण की क्रमिक आवृत्ति है।
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6. 'म' वर्ण की आवृत्ति:
"मैया मैं तौ चंद-खिलौना लैहों।"
स्पष्टीकरण: यहाँ 'म' वर्ण (मैया, मैं) की आवृत्ति के कारण अनुप्रास है।
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7. 'स' वर्ण की आवृत्ति:
"सुरभित सुंदर सुखद सुमन तुझ पर खिलते हैं।"
स्पष्टीकरण: यहाँ 'स' वर्ण (सुरभित, सुंदर, सुखद, सुमन) लगातार दोहराया गया है।
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8. 'क' एवं 'ब' वर्ण की आवृत्ति:
"कल कानन कुंडल मोरपखा उर पे बनमाल बिराजति है।"
स्पष्टीकरण: पहले चरण में 'क' वर्ण तथा अंतिम चरण में 'ब' वर्ण की आवृत्ति है।
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9. 'प' एवं 'स' वर्ण की आवृत्ति:
"बंदउँ गुरु पद पदुम परागा, सुरुचि सुबास सरस अनुरागा।"
स्पष्टीकरण: यहाँ 'प' (पद, पदुम, परागा) और 'स' (सुरुचि, सुबास, सरस) वर्णों की संगीतमय आवृत्ति है।
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10. 'क' वर्ण की आवृत्ति:
"कुके कलि कोकिल कहाँ की कहि बैठी आजि।"
स्पष्टीकरण: यहाँ 'क' वर्ण (कुके, कलि, कोकिल, कहाँ, की, कहि) की बार-बार पुनरावृत्ति हुई है।
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अनुप्रास अलंकार के 5 प्रमुख भेद
1. छेकानुप्रास (वर्णों की केवल एक बार आवृत्ति)
जहाँ अनेक व्यंजनों की आवृत्ति स्वरूप और क्रम से केवल एक बार (अर्थात वर्ण कुल दो बार आए) होती है।
2. वृत्यानुप्रास (वर्णों की अनेक बार आवृत्ति)
जहाँ एक या अनेक वर्णों की आवृत्ति दो से अधिक बार लगातार होती है।
3. लाटानुप्रास (शब्द या वाक्य-खंड की आवृत्ति)
जहाँ शब्द या पूरा वाक्य-खंड समान रूप में आए और साधारण अर्थ भी वही रहे, किंतु अन्वय (तात्पर्य/प्रसंग) बदलने से अर्थ में भेद आ जाए।
4. श्रुत्यानुप्रास (एक ही उच्चारण स्थान वाले वर्ण)
जहाँ मुख के एक ही उच्चारण स्थान (जैसे केवल दंत्य त, थ, द, ध, न अथवा केवल कंठ्य) से उच्चारित होने वाले वर्णों की बहुलता हो, जो कानों को सुनने में मधुर लगे।
5. अंत्यानुप्रास (चरण के अंत की तुकबंदी)
जहाँ छंद या कविता की प्रत्येक पंक्ति के अंतिम वर्णों और स्वरों में तुक (Rhyme) मिलती हो।
10 प्रमुख प्रामाणिक उदाहरण, स्पष्टीकरण एवं संपूर्ण अर्थ
1. 'त' वर्ण की आवृत्ति:
"तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।"
स्पष्टीकरण: यहाँ प्रत्येक शब्द के आरंभ में 'त' वर्ण लगातार पाँच बार आया है, जिससे वृत्यानुप्रास का सौंदर्य बनता है।
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2. 'च' एवं 'ल' वर्ण की आवृत्ति:
"चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल-थल में।"
स्पष्टीकरण: 'चारु', 'चंद्र', 'चंचल' में 'च' वर्ण की तथा 'चंचल', 'खेल', 'जल', 'थल' में 'ल' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
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3. 'र' एवं 'प' वर्ण की आवृत्ति:
"रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम।"
स्पष्टीकरण: प्रथम चरण में 'र' वर्ण और द्वितीय चरण में 'पतित पावन' में 'प' वर्ण की आवृत्ति है।
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4. 'म' एवं 'स' वर्ण की आवृत्ति:
"मुदित महीपति मंदिर आए, सेवक सचिव सुमंत बुलाए।"
स्पष्टीकरण: प्रथम पद में 'म' वर्ण (मुदित, महीपति, मंदिर) और द्वितीय पद में 'स' वर्ण (सेवक, सचिव, सुमंत) की लगातार आवृत्ति है।
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5. 'प' एवं 'स' वर्ण की आवृत्ति:
"बंदउँ गुरु पद पदुम परागा, सुरुचि सुबास सरस अनुरागा।"
स्पष्टीकरण: 'पद पदुम परागा' में 'प' वर्ण तथा 'सुरुचि सुबास सरस' में 'स' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
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6. 'क' वर्ण की आवृत्ति:
"कालिंदी कूल कदंब की डारन।" (रसखान के सवैये)
स्पष्टीकरण: 'कालिंदी', 'कूल', 'कदंब', 'की' शब्दों के आरंभ में 'क' वर्ण की आवृत्ति है।
📖 क्लिक करके पंक्ति का सरल अर्थ देखें
7. 'भ' वर्ण की आवृत्ति:
"भव्य भावों में भयानक भावना भरना नहीं।"
स्पष्टीकरण: यहाँ प्रत्येक शब्द के प्रारंभ में 'भ' वर्ण की संगीतात्मक आवृत्ति हुई है।
📖 क्लिक करके पंक्ति का सरल अर्थ देखें
8. 'स' वर्ण की आवृत्ति:
"सत्य सनेह सील सुख सागर।"
स्पष्टीकरण: श्रीराम के गुणों का वर्णन करते हुए 'स' वर्ण की पाँच बार निरंतर आवृत्ति की गई है।
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9. 'द' वर्ण की आवृत्ति:
"दमके दतियाँ द्युति दामिनि जैसी।"
स्पष्टीकरण: दाँतों की चमक का वर्णन करते हुए 'द' वर्ण (दमके, दतियाँ, द्युति, दामिनि) की आवृत्ति हुई है।
📖 क्लिक करके पंक्ति का सरल अर्थ देखें
10. लाटानुप्रास का विशिष्ट उदाहरण:
"पराधीन जो जन नहीं, स्वर्ग नरकता हेतु।
पराधीन जो जन, नहीं स्वर्ग नरकता हेतु॥"
स्पष्टीकरण: दोनों पंक्तियों में शब्द समान हैं, केवल अल्पविराम (,) का स्थान बदलने से अन्वय बदल जाता है।
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📝 परीक्षोपयोगी अभ्यास प्रश्न (उत्तर सहित)
नीचे दी गई पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार का कारण पहचानें और क्लिक करके उत्तर देखें:
प्र. 1: "भव्य भावों में भयानक भावना भरना नहीं।" — इसमें कौन-सा वर्ण दोहराया गया है?
प्र. 2: "विमल वाणी ने वीणा ली, कमल कोमल कर में सप्रीत।" — इसमें अनुप्रास कहाँ है?
प्र. 3: "दादुर दंदुर बोलहिं डोरा।" — इसमें कौन-सा अलंकार है और क्यों?
प्र. 4: परीक्षा में अनुप्रास अलंकार का स्पष्टीकरण कैसे लिखें ताकि पूरे अंक मिलें?
परीक्षोपयोगी स्व-मूल्यांकन अभ्यास
नीचे दी गई काव्य पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़कर अलंकार और आवृत्ति वाले वर्ण को पहचानें, फिर 'उत्तर देखें' पर क्लिक करके अपना उत्तर जाँचें:
प्रश्न 1: "विमल वाणी ने वीणा ली, कमल कोमल कर में सप्रीत।" — इसमें कौन-सा अलंकार और कौन-से वर्णों की आवृत्ति है?
👉 उत्तर और स्पष्टीकरण देखें
स्पष्टीकरण: 'विमल वाणी ने वीणा' में 'व' वर्ण की तथा 'कमल कोमल कर' में 'क' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
प्रश्न 2: "सुरभित सुंदर सुखद सुमन तुझ पर खिलते हैं।" — पंक्ति में अनुप्रास का कौन-सा वर्ण चमत्कार उत्पन्न कर रहा है?
👉 उत्तर और स्पष्टीकरण देखें
स्पष्टीकरण: 'सुरभित', 'सुंदर', 'सुखद', 'सुमन' शब्दों में लगातार 'स' वर्ण आया है।
प्रश्न 3: "कुकुर कूकते कलित कुसुम पर।" — इसमें अनुप्रास का कौन-सा उप-भेद है?
👉 उत्तर और स्पष्टीकरण देखें
स्पष्टीकरण: 'क' वर्ण की आवृत्ति दो से अधिक बार लगातार हुई है।
प्रश्न 4: "तेगबहादुर, हाँ, वे ही थे गुरु-पदवी के पात्र समर्थ, / तेगबहादुर, हाँ, वे ही थे गुरु-पदवी थी जिनके अर्थ।" — इसमें कौन-सा अनुप्रास भेद है?
👉 उत्तर और स्पष्टीकरण देखें
स्पष्टीकरण: यहाँ पूरे वाक्य-खंड की आवृत्ति हुई है और अंतिम शब्दों के अन्वय-भेद से भावार्थ में परिवर्तन हुआ है।
प्रश्न 5: अनुप्रास और यमक में सबसे बड़ा तकनीकी अंतर क्या है?
👉 उत्तर और स्पष्टीकरण देखें
स्पष्टीकरण: अनुप्रास में केवल वर्णों (अक्षरों) की आवृत्ति होती है (अर्थ का अलग होना आवश्यक नहीं), जबकि यमक में पूरा सार्थक शब्द दोहराया जाता है और हर बार उसका अर्थ भिन्न होना अनिवार्य है।

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