महामृत्युञ्जय मन्त्र

header ads

कक्षा-6 | पाठ-09

नवमः पाठः

अतिथिदेवो भव

(अतिथि देव समान होते हैं - भारतीय संस्कृति एवं जीव-सेवा का पावन सन्देश)

📚 पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या: [पृष्ठ - ९९ से १०५]

1. पाठ परिचय (Introduction) [पृष्ठ - ९९]

भारतीयसंस्कृतौ अतिथीनां नितरां महत्त्वम् अस्ति। 'अतिथिदेवो भव' इति उपनिषदः वचनम् अस्ति। अस्माकं देशे न केवलं मनुष्याः, अपि तु अन्ये प्राणिनः अपि अतिथिरूपेण प्रीतिपात्राणि भवन्ति। अस्मिन् पाठे राधिका नाम्न्याः बालिकायाः गृहे आगतायाः मार्जार्याः तस्याः चतुर्णां शावकानां च सेवा-प्रसङ्गः दर्शितः अस्ति।

(भारतीय संस्कृति में अतिथियों का अत्यधिक महत्त्व है। 'अतिथिदेवो भव' उपनिषद का महावाक्य है। हमारे देश में न केवल मनुष्य, अपितु अन्य प्राणी भी अतिथि के रूप में प्रेम के पात्र होते हैं। इस पाठ में राधिका नाम की बालिका के घर आई एक बिल्ली और उसके चार बच्चों की निस्वार्थ सेवा का सुंदर प्रसंग दर्शाया गया है।)

2. कथा एवं संवाद प्रसंग (Story & Dialogue) [पृष्ठ - ९९, १००]

प्रसंगः: राधिकायाः गृहे नूतनाः अतिथयः सन्ति।
विवरण: राधिका इन दिनों बहुत प्रसन्न है क्योंकि उसके घर की छत पर नए विशिष्ट अतिथि (एक बिल्ली और उसके चार बच्चे - तन्वी, मृद्वी, शबलः, भीमः) आए हैं। राधिका बिल्ली को दूध पिलाती है और उनका ध्यान रखती है।
पितामही: राधिके ! अतिथयः कदा आगच्छन्ति इति न जानीमः। किन्तु यदा ते अत्र आगच्छन्ति तदा तेषाम् एतादृशी सेवा करणीया।
दादी जी: राधिका! अतिथि कब आ जाते हैं, हम नहीं जानते। परंतु जब वे आ जाएँ, तब उनकी इसी प्रकार सेवा करनी चाहिए।
राधिका: अस्तु, करोमि। किन्तु किमर्थम् ?
राधिका: ठीक है, मैं करूँगी। परंतु किस लिए?
पितामही: 'अतिथिदेवो भव' । अर्थात् अतिथिः अस्माकं देवः अस्ति इति चिन्तयतु। तस्य आदरेण सेवां करोतु।
दादी जी: 'अतिथिदेवो भव' - अर्थात् अतिथि हमारे ईश्वर के समान हैं, ऐसा विचार करो और उनका आदरपूर्वक सत्कार करो।

🌿 योग्यताविस्तरः - अव्ययलक्षणम् एवं बालक-मार्जाल-गीतम् [पृष्ठ - १०३, १०४]

सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु च विभक्तिषु ।
वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम् ॥

हिंदी भावार्थ: जो शब्द तीनों लिंगों, सभी विभक्तियों और तीनों वचनों में हमेशा एक समान रहता है, जिसमें कोई रूप-परिवर्तन नहीं होता, उसे 'अव्यय' कहते हैं।


मार्जाल ! रे मार्जाल ! कुत्र गतोऽसि त्वम् ?
अत्रैवास्मि आगतोऽस्म राज गृहादेवम् ॥
मार्जाल ! रे मार्जाल ! किं दृष्टं तत्र ?
तावद्दीर्घः मूषकपुत्रः न हि दृष्टोऽन्यत्र ॥

हिंदी भावार्थ: हे बिलौटे! तुम कहाँ गए थे? मैं यहीं राजमहल से आया हूँ। हे बिलौटे! तुमने वहाँ क्या देखा? वहाँ इतना बड़ा चूहे का बच्चा देखा जो कहीं और नहीं देखा!

💡 विशेष टिप्पणी (व्यावहारिक व सांस्कृतिक बोध):

  • पञ्चमहायज्ञाः: भारतीय परम्परा में पाँच महायज्ञ (देवयज्ञ, पितृयज्ञ, ब्रह्मयज्ञ, भूतयज्ञ और मनुष्य/अतिथि यज्ञ) बताए गए हैं। अतिथि सेवा इसी पावन कर्तव्य का अंग है।
  • स्थानवाचक अव्यय ज्ञान (Positional Avyaya Words):
    • अत्र: यहाँ | तत्र: वहाँ | कुत्र: कहाँ | सर्वत्र: सब जगह
    • उपरि: ऊपर | अधः: नीचे | अन्तः: अंदर | बहिः: बाहर
    • पुरतः: सामने | पृष्ठतः: पीछे | दक्षिणतः: दाएँ | वामतः: बाएँ

3. क्रमवार अभ्यास कार्य (Exercises) [पृष्ठ - १००, १०१, १०२, १०३]

अभ्यास १: एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें) [पृष्ठ - १००]

  1. (क) राधिका कथं चलति स्म ?
    उत्तरम्: कूर्दमाना (कूदती हुई)
  2. (ख) गृहे कति अतिथयः सन्ति ?
    उत्तरम्: पञ्च (पाँच)
  3. (ग) कां दृष्ट्वा शावकाः भीताः न भवन्ति ?
    उत्तरम्: राधिकाम्
  4. (घ) मार्जार्याः कति शावकाः ?
    उत्तरम्: चत्वारः (चार)
  5. (ङ) राधिका मार्जार्ये किं ददाति ?
    उत्तरम्: क्षीरम् (दूध)

अभ्यास २: पूर्णवाक्येन उत्तरत (पूर्ण वाक्य में उत्तर दें) [पृष्ठ - १०१]

  1. (क) मार्जारीशावकानां नामानि कानि ?
    उत्तरम्: मार्जारीशावकानां नामानि तन्वी, मृद्वी, शबलः, भीमः च सन्ति।
  2. (ख) राधिका मार्जारीशावकान् किं पाठयति ?
    उत्तरम्: राधिका मार्जारीशावकान् 'अतिथिदेवो भव' इति पाठयति।
  3. (ग) विशिष्टाः अतिथयः के ?
    उत्तरम्: काचित् मार्जारी तस्याः चत्वारः शावकाः च विशिष्टाः अतिथयः सन्ति।

अभ्यास ७: अव्ययपदानि चित्वा लिखत (अव्यय शब्द छाँटकर लिखें) [पृष्ठ - १०२]

  • (क) अमितः गृहात् बहिः गच्छति । ➔ अव्ययम्: बहिः
  • (ख) एकः वानरः वृक्षस्य उपरि तिष्ठति । ➔ अव्ययम्: उपरि
  • (ग) सः फलानि अधः क्षिपति । ➔ अव्ययम्: अधः
  • (घ) तत्र एकः बिडालः अस्ति । ➔ अव्ययम्: तत्र
  • (ङ) बिडालः गृहस्य अन्तः प्रविशति । ➔ अव्ययम्: अन्तः

4. व्याकरणिक घटकाः (Grammar Tables)

(i) क्रियापद सारणी (Verbs Table)

क्र.सं. क्रियापद मूल धातु लकार-पुरुष-वचन हिंदी अर्थ
१चलतिचलःलट्, प्रथम, एकवचनचलता/चलती है
२पिबतिपा (पिब्)लट्, प्रथम, एकवचनपीता/पीती है
३हसतिहस्लट्, प्रथम, एकवचनहंसता/हंसती है
४पृच्छतिप्रच्छ्लट्, प्रथम, एकवचनपूछता/पूछती है

(ii) कठिन शब्दार्थ सारणी (Vocabulary Table) [पृष्ठ - १००]

क्र.सं. कठिन शब्द संस्कृत व्याख्या हिंदी अर्थ अंग्रेजी अर्थ
१शावकाःमार्जारस्य शिशवःबिल्ली के बच्चेKittens
२अहोरात्रम्अहर्निशम्दिन-रातDay and night
३कार्यकलापान्गतिविधीन्गतिविधियों कोActivities
४आदिनम्सम्पूर्णदिनम्दिन भरWhole day

(iii) अव्यय, उपसर्ग एवं प्रत्यय सारणी

प्रकार पद (Word) संरचना/विवरण अर्थ
अव्यय पदअत्र, तत्र, कुत्र, उपरि, अधः, बहिः, अन्तःस्थानवाचक अव्यययहाँ, वहाँ, कहाँ, ऊपर, नीचे, बाहर, अंदर
प्रत्यय पददृष्ट्वा, मिलित्वादृश् + क्त्वा, मिलि + क्त्वादेखकर, मिलकर

(iv) पाठगत सन्धि सारणी (Sandhi Table)

क्र.सं. सन्धि पद विच्छेद (Breakup) सन्धि का नाम
१अहोरात्रम्अहः + रात्रम्विसर्ग सन्धि
२छद्याः उपरिछद्याः + उपरिविसर्ग सन्धि (लोप)
३अतिथिदेवःअतिथिः + देवःविसर्ग लोप सन्धि

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ