महामृत्युञ्जय मन्त्र

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कक्षा-6 | पाठ-12

द्वादशः पाठः

त्वम् आपणं गच्छ

(तुम बाजार जाओ - लोट्लकारः (आज्ञा/प्रार्थना) एवं व्यावहारिक-व्यवहारः)

📚 पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या: [पृष्ठ - १२१ से १२९]

1. पाठ परिचय (Introduction) [पृष्ठ - १२१]

अस्मिन् पाठे माता-पुत्रयोः तथा ग्राहक-आपणिकयोः (दुकानदारस्य) व्यवहार-संवादस्य माध्यमः गृहीतः अस्ति। अनेन सह संस्कृत-व्याकरणस्य 'लोट्लकारस्य' (Imperative Mood - आज्ञा/प्रार्थना/अनुमति) प्रयोगः, सङ्ख्या-गणना, धन-व्यवहारः च सुगमरीत्या पाठिताः सन्ति।

(इस पाठ में माता-पुत्र और ग्राहक-दुकानदार के बीच बातचीत के माध्यम से बाजार व्यवहार को दर्शाया गया है। इसके साथ ही संस्कृत व्याकरण के 'लोट्लकार' (आज्ञा, प्रार्थना एवं अनुमति) का प्रयोग, सामान की सूची बनाना और क्रय-विक्रय का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया है।)

2. गृहे एवं आपणस्य संवादः (Market & Home Dialogues) [पृष्ठ - १२१, १२२]

अम्बा: राकेश ! कुत्र असि ? अत्र आगच्छ। त्वम् आपणं गच्छ। वस्तूनि आनय।
माता: राकेश! कहाँ हो? यहाँ आओ। तुम बाजार जाओ। सामान लाओ।
राकेशः: अस्तु। स्यूतं ददातु। वस्तूनां नामावलीम् अहम् स्वीकरोमि।
राकेश: ठीक है। थैला दीजिए। वस्तुओं की सूची (List) मैं स्वीकार करता हूँ।
अम्बा: स्वीकुरु। धनम् अपि नय। मार्गे यानानां गतिं पश्यतु। सावधानं पारं गच्छतु।
माता: ले लो। पैसे भी ले जाओ। रास्ते में वाहनों की गति देखना और सावधानी से रास्ता पार करना।
राकेशः: महोदय ! कृपया एतां नामावलीं पश्यतु, वस्तूनि च ददातु। (मुद्गः-अर्धकिलो, गुडः-१ किलो, शर्करा-१ किलो, सर्षपः-पादकिलो)
राकेश (दुकान पर): महोदय! कृपया इस सूची को देखिए और वस्तुएँ दीजिए (मूँग दाल-आधा किलो, गुड़-1 किलो, चीनी-1 किलो, सरसों-पाव किलो)।
आपणिकः: आहत्य नवत्यधिकानि चत्वारि शतानि (४९०) रूप्यकाणि ददातु। दश (१०) रूप्यकाणि अवशिष्टानि, स्वीकरोतु।
दुकानदार: कुल चार सौ नब्बे (490) रुपये हुए। (500 रुपये में से) दस रुपये बाकी बचे हैं, ले लीजिए।

🌿 योग्यताविस्तरः - कुरु उपकारं, कुरु उद्धारम् (लोट्लकार-गीतम्) [पृष्ठ - १२९]

मा कुरु दर्पं मा कुरु गर्वं मा भव मानी मानय सर्वम् ।
मा भज दैन्यं मा भज शोकं मुदितमना भव मोदय लोकम् ॥
तनयं पाठय तनयां पाठ्य शिक्षय सुगुणं दुर्गुणं वारय ।
कुरु उपकारं कुरु उद्धारम् अपनय भारं त्यज अपकारम् ॥

हिंदी भावार्थ: घमंड मत करो, गर्व मत करो, अभिमान से बचो और सबका सम्मान करो। दीनता मत अपनाओ, शोक मत करो, प्रसन्नचित्त रहो और संसार को आनंदित करो। पुत्र और पुत्री को पढ़ाओ, अच्छे गुण सिखाओ, दुर्गुण दूर करो। उपकार करो, दूसरों का उद्धार करो और अपकार का त्याग करो।

💡 विशेष टिप्पणी एवं व्याकरण नियम (लोट्लकार-अवबोधम्):

  • लोट्लकारः (Imperative Mood): इसका प्रयोग आज्ञा देने, प्रार्थना करने, परामर्श देने या अनुमति माँगने के लिए होता है।
    • प्रथम पुरुष: पठतु (वह पढ़े), पठन्तु (वे सब पढ़ें)
    • मध्यम पुरुष: पठ (तुम पढ़ो), पठत (तुम सब पढ़ो)
    • उत्तम पुरुष: पठानि (मैं पढ़ूँ), पठाम (हम सब पढ़ें)
  • सड़क सुरक्षा संकेत (Traffic Signs - पृष्ठ १२७):
    • तिष्ठ: रुको | प्रतीक्षस्व: प्रतीक्षा करो | गच्छ: जाओ
    • वामतः गच्छ: बाएँ चलो | दक्षिणतः गच्छ: दाएँ चलो

3. क्रमवार अभ्यास कार्य (Exercises) [पृष्ठ - १२५, १२६, १२७, १२८]

अभ्यास ३: लट्-लकारात् लोट्-लकारे परिवर्तनम् [पृष्ठ - १२६]

लंट्लकार पदम् लोट्लकार पदम् (उत्तरम्)
पठतिपठतु
खादतिखादतु
क्रीडामिक्रीडानि
पश्यसिपश्य
गच्छामिगच्छानि

अभ्यास ४: एकवचनात् बहुवचने लोट्लकार रूपम् [पृष्ठ - १२६]

  • (क) उत्तिष्ठतु ➔ उत्तिष्ठन्तु
  • (ख) आगच्छतु ➔ आगच्छन्तु
  • (ग) उपविशतु ➔ उपविशन्तु
  • (घ) गच्छ ➔ गच्छत
  • (ङ) खादतु ➔ खादन्तु

4. व्याकरणिक घटकाः (Grammar Tables)

(i) लोट्लकार धातु-रूप सारणी (पठ्-धातुः) [पृष्ठ - १२४, १२९]

पुरुषः एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःपठतुपठताम्पठन्तु
मध्यमपुरुषःपठपठतम्पठत
उत्तमपुरुषःपठानिपठावपठाम

(ii) कठिन शब्दार्थ सारणी (Vocabulary Table) [पृष्ठ - १२३, १२४]

क्र.सं. कठिन शब्द संस्कृत व्याख्या हिंदी अर्थ अंग्रेजी अर्थ
१स्यूतम्प्रसेवम्थैला / झोलाBag
२आपणम्वस्तु-विक्रय-केन्द्रम्बाजार / दुकानMarket / Shop
३चाकलेहःचाकलेहःचॉकलेटChocolate
४अवशिष्टम्शेषभागःबचा हुआ / बाकीRemaining

(iii) अव्यय, उपसर्ग एवं प्रत्यय सारणी

प्रकार पद (Word) संरचना/विवरण अर्थ
अव्यय पदअत्र, मा, पुनः, सावधानम्, केवलम्अविकारी शब्दयहाँ, मत, फिर, सावधानी से, केवल
उपसर्ग पदआनय, आगच्छतिआ + नी, आ + गम्लाओ, आता है

(iv) पाठगत सन्धि सारणी (Sandhi Table)

क्र.सं. सन्धि पद विच्छेद (Breakup) सन्धि का नाम
१इतोऽपिइतः + अपिउत्त्व विसर्ग सन्धि
२नवत्यधिकानिनवति + अधिकानियण् स्वर सन्धि
३पुनरपिपुनः + अपिरुत्व विसर्ग सन्धि

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