महामृत्युञ्जय मन्त्र

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कक्षा-6 | पाठ-13

त्रयोदशः पाठः

पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि

(पृथ्वी पर तीन रत्न हैं - नीति एवं जीवन-मूल्य आधारित सुभाषित)

📚 पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या: [पृष्ठ - १३० से १४०]

1. पाठ परिचय (Introduction) [पृष्ठ - १३०]

सुन्दरवचनानि एव सुभाषितानि भवन्ति। एतानि अस्माकं कृते उत्तमकार्यार्थं प्रेरणां यच्छन्ति। अस्मिन् पाठे जीवन-व्यवहारस्य, परिश्रमस्य, विद्यायाः, मातृभूमेः च महत्त्वं वर्णयन्ति नीतिश्लोकाः गृहीताः सन्ति।

(सुंदर और कल्याणकारी वचनों को ही सुभाषित कहते हैं। ये हमें श्रेष्ठ कर्मों के लिए प्रेरणा देते हैं। इस पाठ में जीवन-मूल्यों, परिश्रम, विद्या, सदाचार और मातृभूमि की महिमा बताने वाले प्रसिद्ध नीति-श्लोकों का संकलन है।)

2. कक्षा-संवादः (Classroom Interaction) [पृष्ठ - १३०]

शिक्षकः: छात्राः ! पश्यन्तु, अद्य मम हस्ते स्फोरकपत्राणि (Posters) सन्ति। एतानि भित्तौ स्थापयन्तु।
शिक्षक: छात्रों! देखिए, आज मेरे हाथ में पोस्टर हैं। इन्हें दीवार पर लगाइए और स्वयं देखिए।
छात्राः: श्रीमन् ! स्फोरकपत्रे तु सुन्दरं चित्रम् अस्ति, श्लोकाः अपि सन्ति।
छात्र: महोदय! पोस्टरों में सुंदर चित्र हैं और श्लोक भी लिखे हैं।
शिक्षकः: सत्यम् ! एतानि सुभाषितानि सन्ति। एतानि अस्माकं कृते उत्तमकार्यार्थ प्रेरणां यच्छन्ति।
शिक्षक: सत्य! ये सुभाषित हैं, जो हमें उत्तम कार्यों के लिए प्रेरणा देते हैं। आइए, इन्हें पढ़ते हैं।

🌿 पाठगतानि सुभाषितानि सभावार्थम् (Subhashitas & Meanings) [पृष्ठ - १३१-१३४]

पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम् ।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते ॥१॥

हिंदी भावार्थ: पृथ्वी पर तीन ही वास्तविक रत्न हैं—जल, अन्न और सुंदर वचन (सुभाषित)। परंतु मूर्ख लोगों द्वारा पत्थर के टुकड़ों को 'रत्न' नाम दिया जाता है।


अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥२॥

हिंदी भावार्थ: यह मेरा है और यह पराया है, ऐसी सोच छोटे (संकीर्ण) मन वालों की होती है। उदार हृदय वालों के लिए तो संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार के समान होती है।


उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः ।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः ॥३॥

हिंदी भावार्थ: कार्य केवल इच्छा करने से नहीं, बल्कि परिश्रम (उद्यम) से ही सिद्ध होते हैं। जैसे सोए हुए सिंह के मुख में हिरण स्वयं प्रवेश नहीं करते।


अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः ।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम् ॥४॥

हिंदी भावार्थ: जो व्यक्ति नित्य प्रणाम करने की आदत वाला और बुजुर्गों की सेवा करने वाला होता है, उसकी चार चीजें हमेशा बढ़ती हैं—आयु, विद्या, यश और बल।


विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम् ।
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम् ॥५॥

हिंदी भावार्थ: विद्या विनय देती है, विनय से योग्यता आती है, योग्यता से धन प्राप्त होता है, धन से धर्म होता है और धर्म से परम सुख मिलता है।


अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते ।
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥६॥

हिंदी भावार्थ: श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं—हे लक्ष्मण! सोने से बनी होने पर भी यह लंका मुझे पसंद नहीं है, क्योंकि माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर महान हैं।

💡 विशेष टिप्पणी (प्रमुख ग्रन्थ एवं सांस्कृतिक संदर्भ) [पृष्ठ - १४०]:

  • चाणक्यनीतिः: आचार्य चाणक्य द्वारा रचित नीतिग्रंथ, जिसमें जीवन-मार्गदर्शन दिया गया है।
  • मनुस्मृतिः: महर्षि मनु द्वारा रचित प्राचीन नीति एवं धर्मशास्त्र ग्रंथ।
  • पञ्चतन्त्रम्: पंडित विष्णुशर्मा द्वारा रचित विश्वप्रसिद्ध बाल-नीति कथाग्रंथ।
  • हितोपदेशः: नारायण पंडित द्वारा रचित पशु-पक्षियों की शिक्षाप्रद कथाओं का संग्रह।
  • रामायणम्: महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित आदिकाव्य, जो आदर्श जीवन-मूल्यों का प्रतीक है।

3. क्रमवार अभ्यास कार्य (Exercises) [पृष्ठ - १३५-१३९]

अभ्यास १: एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें) [पृष्ठ - १३५]

  1. (क) पृथिव्यां कति रत्नानि सन्ति ?
    उत्तरम्: त्रीणि (तीन)
  2. (ख) अयं निजः परो वा इति गणना केषां भवति ?
    उत्तरम्: लघुचेतसाम्
  3. (ग) कार्याणि केन सिद्ध्यन्ति ?
    उत्तरम्: उद्यमेन (परिश्रमेन)
  4. (घ) विद्या किं ददाति ?
    उत्तरम्: विनयम्
  5. (ङ) जननी जन्मभूमिश्च कस्मात् गरीयसी ?
    उत्तरम्: स्वर्गात्

अभ्यास ५: 'आम्' अथवा 'न' इति लिखत (सही / गलत) [पृष्ठ - १३७]

  • (क) किं धर्मेण सुखं प्राप्यते ? ➔ आम्
  • (ख) किं विद्या विनयं ददाति ? ➔ आम्
  • (ग) किम् अभिवादनशीलस्य विद्या वर्धते ? ➔ आम्
  • (घ) किम् उद्यमेन कार्याणि नश्यन्ति ? ➔ न
  • (ङ) किं जन्मभूमिः स्वर्गात् गरीयसी भवति ? ➔ आम्

4. व्याकरणिक घटकाः (Grammar Tables)

(i) क्रियापद सारणी (Verbs Table)

क्र.सं. क्रियापद मूल धातु लकार-पुरुष-वचन हिंदी अर्थ
१सिद्ध्यन्तिसिध्लट्, प्रथम, बहुवचनसिद्ध होते हैं
२वर्धन्तेवृध्लट्, प्रथम, बहुवचनबढ़ते हैं
३ददातिदालट्, प्रथम, एकवचनदेता/देती है
४आप्नोतिआप (आप्रोति)लट्, प्रथम, एकवचनप्राप्त करता है

(ii) कठिन शब्दार्थ सारणी (Vocabulary Table) [पृष्ठ - १३५]

क्र.सं. कठिन शब्द संस्कृत व्याख्या हिंदी अर्थ अंग्रेजी अर्थ
१मूढैःमूर्खजनैःमूर्खों द्वाराBy fools
२वसुधाधरित्रीपृथ्वीEarth
३उद्यमेनपरिश्रमेणपरिश्रम सेBy effort/hard work
४गरीयसीश्रेष्ठाअधिक महान / श्रेष्ठGreater / Superior

(iii) लिङ्गानुसारं प्रथमान्तपद सारणी [पृष्ठ - १३८]

प्रथमान्त-पुंलिङ्गम् प्रथमान्त-स्त्रीलिङ्गम् प्रथमान्त-नपुंसकलिङ्गम्
उद्यमःवसुधासाहसम्
पराक्रमःजननीधनम्
विनयःविद्यापत्रम्

(iv) पाठगत सन्धि सारणी (Sandhi Table)

क्र.सं. सन्धि पद विच्छेद (Breakup) सन्धि का नाम
१वसुधैववसुधा + एववृद्धि स्वर सन्धि
२पात्रत्वाद्धनम्पात्रत्वात् + धनम्व्यंजन सन्धि (जश्त्व)
३स्वर्गादपिस्वर्गात् + अपिव्यंजन सन्धि (जश्त्व)

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