महामृत्युञ्जय मन्त्र

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कक्षा-6 | पाठ-14

चतुर्दशः पाठः

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः

(आलस्य ही मनुष्य के शरीर में स्थित सबसे बड़ा शत्रु है - परिश्रमस्य महत्त्वम्)

📚 पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या: [पृष्ठ - १४१ से १५१]

1. पाठ परिचय (Introduction) [पृष्ठ - १४१]

अस्मिन् पाठे आलस्यस्य त्यागं कृत्वा परिश्रमस्य महत्त्वं दर्शयितुं एका प्रेरणादायी कथा वर्णिता अस्ति। यः परिश्रमं करोति, सः एव जीवने सफलतां प्राप्नोति। परिश्रमः एव मनुष्यस्य श्रेष्ठः मित्रम् अस्ति, आलस्यं तु शरीरस्थः महान् शत्रुः। अनेन सह अस्मिन् पाठे व्याकरणस्य 'द्वितीयाविभक्तेः' (Accusative Case) प्रयोगः अपि पाठितः अस्ति।

(इस पाठ में आलस्य का त्याग कर परिश्रम का महत्त्व समझाने के लिए एक प्रेरणादायक कथा दी गई है। जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त करता है। परिश्रम ही मनुष्य का सबसे सच्चा मित्र है और आलस्य मनुष्य के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा शत्रु। पाठ में व्याकरण के रूप में 'द्वितीया विभक्ति' (कर्म कारक) का अभ्यास भी कराया गया है।)

2. कथा एवं संवाद प्रसंग (Story & Dialogues) [पृष्ठ - १४१-१४३]

पुत्रः: मातः ! अद्य तु अवकाशदिनम् अस्ति। अद्य अहं सम्पूर्णदिने विश्रामं करिष्यामि।
पुत्र: माता जी! आज तो छुट्टी का दिन है। आज मैं पूरे दिन आराम करूँगा[।
माता: अवकाशः विद्यालयस्य अस्ति न तु स्वाध्यायस्य। बहु आलस्यं करोषि। उत्तिष्ठ, परिश्रमं कुरु।
माता: छुट्टी स्कूल की है, पढ़ाई की नहीं। बहुत आलस्य करते हो। उठो, परिश्रम करो।
कथा-सारः: भिक्षुकस्य धनिकस्य च संवादः [पृष्ठ - १४२, १४३]
एक हृष्ट-पुष्ट और बलवान युवक भीख माँगता था। एक बुद्धिमान धनिक ने उससे उसके हाथ और पैर हजारों रुपयों में खरीदने की इच्छा जताई। जब भिक्षुक ने इनकार किया, तो धनिक ने उसे समझाया कि ईश्वर ने तुम्हें अमूल्य और स्वस्थ शरीर दिया है। आलस्य छोड़कर परिश्रम करो। उस दिन से भिक्षुक ने भीख माँगना छोड़कर मेहनत से धन कमाना शुरू कर दिया।

🌿 मूलपाठः एवं नीतिश्लोकः (Core Shloka & Meaning) [पृष्ठ - १४३, १४४]

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः ।
नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ॥

हिंदी भावार्थ: आलस्य ही मनुष्यों के शरीर में स्थित उनका सबसे बड़ा शत्रु है। परिश्रम के समान कोई सच्चा मित्र या बंधु नहीं है, जिसे करने के बाद मनुष्य कभी दुःखी नहीं होता।

💡 विशेष टिप्पणी एवं व्याकरण नियम (द्वितीयाविभक्ति-बोधः):

  • कर्म कारक (Accusative Case - द्वितीया विभक्ति): क्रिया के फल का प्रभाव जिस संज्ञा या सर्वनाम पर पड़ता है, उसमें द्वितीया विभक्ति होती है (उदा. 'भक्तः देवं नमति', 'बालकाः कथां लिखन्ति')।
  • रूप-रचना (द्वितीया विभक्ति):
    • पुंलिङ्ग (बालक): बालकम्, बालकौ, बालकान्
    • स्त्रीलिङ्ग (बालिका): बालिकाम्, बालिके, बालिकाः
    • नपुंसकलिङ्ग (फल): फलम्, फले, फलानि

3. क्रमवार अभ्यास कार्य (Exercises) [पृष्ठ - १४५-१४८]

अभ्यास १: एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें) [पृष्ठ - १४५]

  1. (क) भिक्षुकः किं करोति स्म ?
    उत्तरम्: भिक्षाटनम्
  2. (ख) कदाचित् तेन मार्गेण कः आगच्छति ?
    उत्तरम्: धनिकः
  3. (ग) भिक्षुकः धनिकात् किम् इच्छति ?
    उत्तरम्: प्रभूतं धनम्
  4. (घ) सौभाग्येन वयं किं प्राप्तवन्तः ?
    उत्तरम्: मानवजन्म

अभ्यास २: 'आम्' अथवा 'न' इति लिखत (सही / गलत) [पृष्ठ - १४५]

  • (क) भिक्षुकः उन्नतः दृढकायः च आसीत्। ➔ आम्
  • (ख) भिक्षुकः प्रभूतं धनम् इच्छति। ➔ आम्
  • (ग) भिक्षुकः धनिकाय पादौ ददाति। ➔ न
  • (घ) भिक्षुकः भिक्षाटनं त्यजति। ➔ आम्

अभ्यास ५: द्वितीयाविभक्ति-एकवचन-रूपेण वाक्यपूरणम् [पृष्ठ - १४७]

  • (क) छात्राः (ग्रन्थ) पठन्ति। ➔ छात्राः ग्रन्थं पठन्ति।
  • (ख) बालकाः (कथा) लिखन्ति। ➔ बालकाः कथां लिखन्ति।
  • (ग) रमा (लेखनी) क्रीणाति। ➔ रमा लेखनीं क्रीणाति।
  • (घ) चित्रकारः (चित्र) रचयति। ➔ चित्रकारः चित्रं रचयति।

4. व्याकरणिक घटकाः (Grammar Tables)

(i) क्रियापद सारणी (Verbs Table)

क्र.सं. क्रियापद मूल धातु लकार-पुरुष-वचन हिंदी अर्थ
१करिष्यामिकृलृट्, उत्तम, एकवचनकरूँगा
२प्राप्नोतिआप (प्र + आप)लट्, प्रथम, एकवचनप्राप्त करता है
३यच्छामिदा (यच्छ)लट्, उत्तम, एकवचनदेता हूँ

(ii) कठिन शब्दार्थ सारणी (Vocabulary Table) [पृष्ठ - १४४]

क्र.सं. कठिन शब्द संस्कृत व्याख्या हिंदी अर्थ अंग्रेजी अर्थ
१दृढकायःदृढशरीरःमजबूत शरीर वालाStrong bodied
२प्रभूतम्पर्याप्तम् / अधिकम्अत्यधिक / प्रचुरA lot of
३निराकृतवान्न स्वीकृतवान्अस्वीकार कर दियाRefused
४रिपुःशत्रुःशत्रु / दुश्मनEnemy

(iii) द्वितीया-विभक्ति-रूप सारणी (Declension Table) [पृष्ठ - १४९]

शब्द प्रकार एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
पुंलिङ्गम् (ग्राम)ग्रामम्ग्रामौग्रामान्
स्त्रीलिङ्गम् (माला)मालाम्मालेमालाः
नपुंसकलिङ्गम् (फल)फलम्फलेफलानि

(iv) पाठगत सन्धि सारणी (Sandhi Table)

क्र.सं. सन्धि पद विच्छेद (Breakup) सन्धि का नाम
१शरीरस्थःशरीर + स्थःसंयोग / उपपद तत्पुरुष
२नास्त्युद्यमसःन + अस्ति + उद्यमःदीर्घ एवं यण् सन्धि
३नावसीदतिन + अवसीदतिदीर्घ स्वर सन्धि

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