न खलु वयस्तेजसो हेतुः
(NCERT शारदा - कक्षा ९ संस्कृत पाठ्यपुस्तक)
पाठ्य-परिचयः (पाठ का परिचय) [पृष्ठ - ३८]
भारतस्य स्वतन्त्रतासङ्ग्रामे सशस्त्रान्दोलने बङ्गप्रान्तः अग्रेसरः आसीत्। तस्मिन् बङ्गप्रान्ते मिदनीपुरनामके जनपदे मोहोबनी-ग्रामे नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमे वर्षे (१८८९) दिसम्बरमासस्य तृतीये दिनाङ्के खुदीरामस्य जन्म अभवत्। तस्य जनकस्य नाम त्रैलोक्यनाथः, जनन्याः नाम लक्ष्मीप्रिया देवी च आसीत्। खुदीरामः बाल्यकालतः एव असाधारणः आसीत्। साधारणबालानाम् इव क्रीडादिषु तस्य मनः न रमते स्म। सः देशवासिषु जायमानान् अत्याचारान् दृष्ट्वा व्यथितः भवति स्म। खुदीरामः देशभक्तेषु कश्चन तेजस्वी बालक्रान्तिवीरः हुतात्मा अस्ति।
हिन्दी अनुवाद: भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सशस्त्र आंदोलन में बंगाल प्रांत अग्रणी था। उसी बंगाल प्रांत के मिदनापुर जिले के मोहाबोनी गांव में ३ दिसंबर १८८९ को खुदीराम का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम त्रैलोक्यनाथ और माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था। बचपन में ही माता-पिता का निधन होने के बाद उनकी बड़ी बहन अपरूपा देवी ने उनका पालन-पोषण किया। खुदीराम बचपन से ही असाधारण थे। सामान्य बालकों की भांति खेल-कूद में उनका मन नहीं लगता था। वे देशवासियों पर हो रहे अत्याचारों को देखकर व्यथित होते थे। खुदीराम बोस भारत के अमर बाल क्रांतिकारियों में अग्रगण्य हुतात्मा हैं।
पाठस्य विस्तृत-व्याख्या (पाठ का विस्तृत विवरण) [पृष्ठ - ४०, ४१]
- १. बङ्गभङ्ग-आन्दोलनम् (बंग-भंग आंदोलन): १९०५ ई. में लॉर्ड कर्जन ने बंगाल में स्वतंत्रता की भावना को कुचलने के लिए धर्म के आधार पर बंगाल का विभाजन कर दिया। इसके विरोध में राष्ट्रव्यापी 'बंग-भंग आंदोलन' छिड़ गया। खुदीराम बोस ने मात्र १५ वर्ष की आयु में ही ९वीं कक्षा की पढ़ाई छोड़कर स्वयं को राष्ट्रसेवा में समर्पित कर दिया।
- २. क्रान्तिकार्यं प्रतिज्ञा च (क्रांतिकारी गतिविधि एवं प्रतिज्ञा): खुदीराम बालकों का संगठन बनाकर पदयात्राएं करते, 'वंदे मातरम्' के नारों के साथ पर्चे बांटते। गुप्त संगठन के संचालक सत्येन्द्रनाथ से दीक्षा लेकर उन्होंने और प्रफुल्ल चाकी ने अस्त्र-शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण लिया। महाराणा प्रताप से प्रेरित होकर खुदीराम ने प्रतिज्ञा की—"जब तक भारत मां अंग्रेजों के शासन से मुक्त नहीं होगी, तब तक मैं जूते (पादत्राण) धारण नहीं करूंगा।"
- ३. किङ्ग्ज़फोर्ड-वध-योजना विस्फोटश्च (किंग्सफोर्ड पर बम हमला): क्रूर अंग्रेज जज किंग्सफोर्ड मुजफ्फरपुर स्थानांतरित हुआ, जो देशभक्ताओं पर अत्याचार करता था। २८ अप्रैल १९०८ को खुदीराम और प्रफुल्ल चाकी ने किंग्सफोर्ड की बग्गी पर बम फेंका। दुर्भाग्यवश उस बग्गी में किंग्सफोर्ड के स्थान पर कैनेडी नामक अधिकारी की पत्नी और पुत्री थीं, जिनकी मृत्यु हो गई।
- ४. बलिदानम् हौतात्म्यम् (अमर शहादत): प्रफुल्ल चाकी ने अंग्रेजों के हाथ न आने के लिए स्वयं को गोली मारकर आत्मबलिदान दे दिया। खुदीराम पकड़े गए। अदालत में भी हंसते हुए उन्होंने केवल 'वंदे मातरम्' कहा। ११ अगस्त १९०८ को मात्र १८ वर्ष की अल्पायु में हंसते-हंसते वे फांसी के फंदे पर झूल गए।
"न खलु वयस्तेजसो हेतुः"
(तेजस्वी व्यक्तियों की प्रतिभा और शौर्य का आधार उनकी आयु या उम्र नहीं होती।)
विशेष भावार्थ: जैसे सूर्य का प्रकाश छोटा या बड़ा होने के स्थान पर अपनी प्रखरता से पहचाना जाता है, वैसे ही खुदीराम बोस जैसे महान क्रांतिकारियों ने बहुत छोटी उम्र में भी अपने अद्वितीय त्याग, साहस और देशप्रेम से सिद्ध कर दिया कि तेज और पराक्रम के लिए आयु कोई बाधा या कारण नहीं है।
स्वाध्यायान्मा प्रमदः (युगल-अव्ययानि एवं व्यावहारिक प्रयोगः) [पृष्ठ - ४७, ४८, ४९, ५०]
१. 'चित्' प्रत्यययुक्तानि अनिश्चयवाचक-अव्ययानि [पृष्ठ - ४७]:
संस्कृत भाषा में 'चित्' प्रत्यय का प्रयोग अनिश्चय का भाव दर्शाने के लिए किया जाता है:
• कः + चित् = कश्चित् (कोई - पुल्लिंग), का + चित् = काचित् (कोई - स्त्रीलिंग), किम् + चित् = किञ्चित् (कुछ - नपुंसकलिंग)
• कदा + चित् = कदाचित् (कभी/एक बार), कुत्र + चित् = कुत्रचित् (कहीं), कथम् + चित् = कथञ्चित् (किसी प्रकार)
२. सम्बद्ध-अव्यय-युगलानि (Correlative Adverbs) [पृष्ठ - ४८, ४९]:
• यदा... तदा... (जब... तब...) | यावत्... तावत्... (जब तक... तब तक...)
• यद्यपि... तथापि... (यद्यपि... फिर भी...) | यथा... तथा... (जैसा... वैसा...)
३. संवत्सर-संख्या-लेखनम् (संस्कृत में ईस्वी वर्ष) [पृष्ठ - ४४, ४९]:
• १८८९: नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमं वर्षम् (1889)
• १९०५: पञ्चाधिक-नवदशशततमं वर्षम् (1905)
• १९०८: अष्टाधिक-नवदशशततमं वर्षम् (1908)
• १९४७: सप्तचत्वारिंशदधिक-नवदशशततमं वर्षम् (1947)
अभ्यासाद् जायते सिद्धिः (अभ्यास-कार्यम्) [पृष्ठ - ४४, ४५, ४६, ४७]
प्रश्ना १. पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत (पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए) [पृष्ठ - ४४]:
(क) खुदीरामस्य जन्म कुत्र अभवत् ?
उत्तरम्: खुदीरामस्य जन्म बङ्गप्रान्ते मिदनीपुरनामके जनपदे मोहोबनी-ग्रामे अभवत्।
(ख) खुदीरामः किमर्थं व्यथितः भवति स्म ?
उत्तरम्: खुदीरामः देशवासिषु जायमानान् अत्याचारान् दृष्ट्वा व्यथितः भवति स्म।
(ग) सत्येन्द्रनाथः किम् उपदिष्टवान् ?
उत्तरम्: सत्येन्द्रनाथः उपदिष्टवान् यत् "क्रान्तिकार्यं कर्तुं शरीरं वज्रसदृशं दृढं, बुद्धिः असिधारा इव तीक्ष्णा, मनः गङ्गाजलमिव निर्मलं च भवेत्" इति।
(घ) खुदीरामः कदा पर्यन्तं पादत्राणं न धरिष्यामि इति प्रतिज्ञातवान् ?
उत्तरम्: खुदीरामः प्रतिज्ञातवान् यत् यावत् भारतम् आङ्ग्लशासनात् मुक्तं न भविष्यति तावत् पादत्राणं न धरिष्यामि इति।
(ङ) किमर्थं न्यायाधीशः आङ्ग्लाः अधिकारिणः च चकिताः ?
उत्तरम्: मृत्युदण्डस्य उद्घोषणानन्तरम् अपि खुदीरामस्य मुखे प्रसन्नता, शान्तिः, तृप्तिः, तेजः च दृष्ट्वा न्यायाधीशः आङ्ग्लाः अधिकारिणः च चकिताः।
प्रश्ना २. सत्यम् अथवा असत्यम् इति लिखत (सत्य या असत्य चुनिए) [पृष्ठ - ४४]:
(क) देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति। → सत्यम्
(ख) निर्दयः किङ्ग्ज़फोर्ड् बालान् अपि दण्डयति स्म। → सत्यम्
(ग) खुदीरामस्य आक्रमणेन किङ्ग्ज़फोर्ड् मृतः। → असत्यम्
(घ) खुदीरामः किङ्ग्ज़फोर्डमहोदयस्य रथस्य उपरि विस्फोटकं क्षिप्तवान्। → सत्यम्
(ङ) खुदीरामः बालानां सङ्घटनं कृत्वा पदयात्राम् आयोजयति स्म। → सत्यम्
प्रश्ना ३. संवत्सराणां शब्दानाम् अङ्कैः सह मेलनं कुरुत (वर्षों का मेल कीजिए) [पृष्ठ - ४४]:
- (क) सप्तचत्वारिंशदधिक-नवदशशततमं वर्षम् → ३. १९४७
- (ख) अष्टाधिक-नवदशशततमं वर्षम् → ४. १९०८
- (ग) पञ्चाशदुत्तर-नवदशशततमं वर्षम् → ५. १९५०
- (घ) पञ्चाधिक-नवदशशततमं वर्षम् → १. १९०५
- (ङ) नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमं वर्षम् → २. १८८९
प्रश्ना ६. विग्रहवाक्यं दृष्ट्वा समस्तपदानि पूरयत (समस्त पद बनाइए) [पृष्ठ - ४६]:
(क) देशस्य भक्ताः → देशभक्ताः
(ख) बालः च क्रान्तिवीरः च → बालक्रान्तिवीरः
(ग) वज्रेण सदृशम् → वज्रसदृशम्
(घ) असेः धारा → असिधारा
(ङ) मृत्युः एव दण्डः → मृत्युदण्डः
(च) न साधारणः → असाधारणः
(छ) निर्गता दया यस्मात् सः → निर्दयः
व्याकरणिक घटकाः (व्याकरण सारणियाँ) [पृष्ठ - ४२, ४३, ४६, ४७]
१. कठिन शब्दार्थ सारणी (Vocabulary Table) [पृष्ठ - ४२, ४३]
२. क्रियापद सारणी (Verbs Table) [पृष्ठ - ४६, ४७]
३. अव्यय, उपसर्ग एवं प्रत्यय सारणी (Grammar Components Table) [पृष्ठ - ४७]
४. पाणिनीय/पाठगत सन्धि सारणी (Sandhi Table) [पृष्ठ - ४६]
अग्रिमः पाठः (अगला पाठ)
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