महामृत्युञ्जय मन्त्र

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कक्षा-6 | पाठ-11

एकादशः पाठः

यः जानाति सः पण्डितः

(जो जानता है वही विद्वान है - मनोरञ्जक-संस्कृत-प्रहेलिकाः)

📚 पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या: [पृष्ठ - ११२ से १२०]

1. पाठ परिचय (Introduction) [पृष्ठ - ११२]

संस्कृत-साहित्ये प्रहेलिकानां (पहेलियों के) विशिष्टं स्थानम् अस्ति। प्रहेलिकाः आबालवृद्धं मानसिकम् उल्लासं जनयन्ति। बुद्धेः तार्किकशक्तिं वर्धयन्ति, चिन्तनक्षमतां विकासयन्ति तथा च पूर्वजानां कवीनां कल्पनाशक्तिं दर्शयन्ति।

(संस्कृत साहित्य में पहेलियों का विशिष्ट स्थान है। पहेलियाँ बालकों से लेकर वृद्धों तक सभी को मानसिक आनंद प्रदान करती हैं। ये बुद्धि की तार्किक शक्ति और सोचने की क्षमता को बढ़ाती हैं।)

2. पाठगत प्रहेलिका-व्याख्या (Riddles & Explanations) [पृष्ठ - ११२, ११३]

प्रहेलिका १: भोजनान्ते च किं पेयं जयन्तः कस्य वै सुतः। कथं विष्णुपदं प्रोक्तं तक्रं शक्रस्य दुर्लभम्॥
व्याख्या: इस पहेली के चौथे चरण में ही तीनों प्रश्नों के उत्तर छिपे हैं—
1. भोजन के अंत में क्या पीना चाहिए? ➔ तक्रम् (छाछ)
2. जयंत किसका पुत्र है? ➔ शक्रस्य (इंद्र का)
3. भगवान विष्णु का पद कैसा कहा गया है? ➔ दुर्लभम् (कठिनता से प्राप्त होने वाला)
प्रहेलिका २: न तस्यादिर न तस्यान्तः मध्ये यस्तस्य तिष्ठति। तवाप्यस्ति ममाप्यस्ति यो जानाति स पण्डितः॥
व्याख्या: जिसके आदि (शुरुआत) में 'न' है और अंत में भी 'न' है, जिसके मध्य में 'य' है। जो तुम्हारा भी है और मेरा भी है। उत्तर: नयनम् (आँख)।
प्रहेलिका ३: वृक्षाग्रवासी न च पक्षीराजः त्रिनेत्रधारी न च शूलपाणिः। अकारः यस्य आदिः सकारः यस्य अन्ते अस्ति...
व्याख्या: जिसके प्रारंभ में 'अ' (अकार) है और अंत में 'स' (सकार) है। वृक्ष के आगे फल और फल के आगे वृक्ष। उत्तर: अनानसः (अनन्नास)।
प्रहेलिका ४: किमिच्छति नरः काश्यां भूपानां को रणे हितः। को वन्द्यः सर्वदेवानां दीयतामेकमुत्तरम्॥
व्याख्या: तीन प्रश्नों का एक ही उत्तर—
1. मनुष्य काशी में क्या चाहता है? (मृत्युम् / मोक्ष)
2. युद्ध में राजाओं का हितैषी क्या है? (जयः / विजय)
3. सभी देवों में वंदनीय कौन है? उत्तर: मृत्युञ्जयः (भगवान शिव)।
प्रहेलिका ५: कुलालस्य गृहे ह्यर्थं तदर्थं हस्तिनापुरे। द्वयं मिलित्वा लङ्कायां यो जानाति सः पण्डितः॥
व्याख्या: कुम्हार के घर आधा भाग (कुम्भ) है, हस्तिनापुर में आधा भाग (कर्ण) है। दोनों मिलकर लंका में पूरा रूप बनाते हैं। उत्तर: कुम्भकर्णः।

🌿 योग्यताविस्तरः - हस्तकुटुम्बकम् एवं नीतिश्लोकौ [पृष्ठ - ११९]

एषः स्नेहालुः तातः – अङ्गुष्ठः ॥ निकटे निवसति ननु माता – तर्जनी ॥
ज्येष्ठा पुत्री दीर्घतमा – मध्यमा ॥ तस्याः भगिनी मनोरमा – अनामिका ॥
कनिष्ठबाला अन्ते च – कनिष्ठिका ॥ हस्तकुटुम्बं मम पश्य ॥

हिंदी अर्थ: अंगूठा पिता, तर्जनी माता, मध्यमा बड़ी पुत्री, अनामिका उसकी बहन और कनिष्ठिका सबसे छोटी बालिका है। यह मेरे हाथ का परिवार है।


अलसस्य कुतो विद्या अविद्यस्य कुतो धनम् ।
अधनस्य कुतो मित्रम् अमित्रस्य कुतः सुखम् ॥

हिंदी अर्थ: आलसी को विद्या कहाँ? विद्याहीन को धन कहाँ? निर्धन को मित्र कहाँ? और मित्रहीन को सुख कहाँ?

💡 विशेष टिप्पणी (षष्ठी-विभक्ति-प्रयोगः):

  • षष्ठी विभक्ति (Possessive Case): संबंध बताने के लिए षष्ठी विभक्ति का प्रयोग होता है (उदा. 'रामस्य पुत्रः', 'सीतायाः पतिः')।
  • सम्बन्ध ज्ञान:
    • रामस्य पिता ➔ दशरथः
    • रामायणस्य रचयिता ➔ वाल्मीकिः
    • महाभारतस्य रचयिता ➔ व्यासः
    • पञ्चतन्त्रस्य रचयिता ➔ विष्णुशर्मा

3. क्रमवार अभ्यास कार्य (Exercises) [पृष्ठ - ११५, ११६, ११७, ११८]

अभ्यास १: एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें) [पृष्ठ - ११५]

  1. (क) भोजनान्ते पातुं योग्यं किम् ?
    उत्तरम्: तक्रम् (छाछ)
  2. (ख) सर्वदेवानां वन्दनीयः कः ?
    उत्तरम्: मृत्युञ्जयः (शिवः)
  3. (ग) जयन्तः कस्य सुतः ?
    उत्तरम्: शक्रस्य (इन्द्रस्य)
  4. (घ) लङ्कायां मिलित्वा कस्य पूर्णरूपम् अस्ति ?
    उत्तरम्: कुम्भकर्णस्य

अभ्यास ४: षष्ठीविभक्ति-प्रयोगेण वाक्यरचना [पृष्ठ - ११६]

  • (क) द्विचक्रिका ➔ द्विचक्रिकायाः चक्रं भ्रमति।
  • (ख) वृक्षः ➔ वृक्षस्य फलं खादति।
  • (ग) छात्रा ➔ छात्रायाः नाम पृच्छति।
  • (घ) रामः ➔ रामस्य पुस्तकम् आनयति।

4. व्याकरणिक घटकाः (Grammar Tables)

(i) क्रियापद सारणी (Verbs Table)

क्र.सं. क्रियापद मूल धातु लकार-पुरुष-वचन हिंदी अर्थ
१जनयन्तिजन्लट्, प्रथम, बहुवचनउत्पन्न करते हैं
२जानातिज्ञालट्, प्रथम, एकवचनजानता है
३इच्छतिइष्लट्, प्रथम, एकवचनचाहता है

(ii) कठिन शब्दार्थ सारणी (Vocabulary Table) [पृष्ठ - ११३]

क्र.सं. कठिन शब्द संस्कृत व्याख्या हिंदी अर्थ अंग्रेजी अर्थ
१पेयम्पातुं योग्यम्पीने योग्यFit for drinking
२तक्रम्मथितम्छाछ / मट्ठाButtermilk
३कुलालस्यकुम्भकारस्यकुम्हार काOf the potter

(iii) षष्ठी-विभक्ति-रूप सारणी (Declension Table) [पृष्ठ - ११५, ११६]

शब्द प्रकार एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
पुंलिङ्गम् (राम)रामस्यरामयोःरामाणाम्
सीतायाःसीतायाःसीतयोःसीतानाम्
नपुंसकलिङ्गम् (पुस्तक)पुस्तकस्यपुस्तकयोःपुस्तकानाम्

(iv) पाठगत सन्धि सारणी (Sandhi Table)

क्र.सं. सन्धि पद विच्छेद (Breakup) सन्धि का नाम
१भोजनान्तेभोजन + अन्तेदीर्घ स्वर सन्धि
२तस्यादिःतस्य + आदिःदीर्घ स्वर सन्धि
३तवाप्यस्तितव + अपि + अस्तिदीर्घ एवं यण् सन्धि

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